চুকনগর গণহত্যা, ৫ নং আটলিয়া ইউনিয়ন/ Chuknagar Genocide, 5 No Atlia Union

খুলনা-যশোর-সাতক্ষীরা জেলার সীমান্তবর্তী ভদ্রা নদীর কোলঘেঁষে চুকনগরে খুলনা বাগেরহাটসহ নানা জায়গার হাজার হাজার পরিবার ১৯ মে রাত কাটায়। উদ্দেশ্য ছিলো পরদিন সকালে ভারতের উদ্দেশ্যে যাত্রা। কিন্তু পরদিন ২০ মে ঘটে সম্ভবত পৃথিবীর ইতিহাসে অল্প সময়ে অধিক সংখ্যক মানুষ হত্যার এক ভয়ঙ্কর  হত্যাযজ্ঞ। বেলা সাড়ে দশটা থেকে শুরু হয়ে এই নারকীয় তান্ডব চলে  বিকাল অবধি।

 

গুলি, ব্রাশ ফায়ার, বেওনেটের আঘাতে ও নদীপথে পলায়নরত নর নারী শিশুর সলিল সমাধিতে কতো মানুষের যে মৃত্যু হয় তার সঠিক হিসাব কেউ বলতে পারে না। তবে এই সংখ্যা কোন ক্রমেই দশ হাজারের কম নয়, বরং বেশি বলে মনে করেন প্রত্যক্ষদর্শী চুকনগর কলেজের অধ্যক্ষ এবিএম শফিকুল ইসলাম। পাকিস্তানি  সেনাবাহিনীর উপর তেড়ে যাওয়া চিকন আলী মোড়লকে হত্যার মধ্য দিয়ে এখানকার হত্যাযজ্ঞ শুরু হয়। শহীদ চিকন আলীর ছেলে এরশাদ আলী মোড়ল আজও সেদিনের কথা মনে হলে বিক্ষুব্ধ হয়ে ওঠেন। তিনি বলেন ওরা [পাকিস্তানীরা] মানুষ না,মানুষ কখনো মানুষকে এভাবে মারতে পারে না। প্রাণের মায়ায় যারা পালিয়ে যাচ্ছিল, তাদেরকে ওরা পাখির মত গুলি করে মারলো। গাছে উঠে, পানিতে নেমে কোনভাবেই তারা বাঁচতে পারলো না।

 

এইসব লাশ সরিয়ে ছিলো কাওছার আলী, দলিল উদ্দিন, আনসার সরদার ও ইনছান সরদার। কাওছার আলী বলেন- সারাদিন ধরে লাশ সাফ করতে পারিনি। রক্তে  নদীর পানি  একেবারে টুকটুকে লাল হয়ে গিয়েছিলো। লাশের সংখ্যা দশ বারো হাজারের কম হবে না উল্লেখ করে তিনি বলেন, তাদের একজন বিয়াল্লিশ-শ পর্যন্ত গুনেছিলো। আর গুণতে পারিনি।

 

লাশের গন্ধে নদীর পানি দুর্গন্ধ হয়। এছাড়া পাতাখোলা বিল, বেহারা পাড়া, তাঁতী পাড়া, রায় পাড়া, জেলে পাড়া, বাজার, মন্দির, বটতলা, নদীর তীর, ঝোপ ঝাড়ের আড়াল সকল জায়গায় শুধু লাশ আর লাশ। চুকনগর কলেজ প্রতিষ্ঠার সময় এখানে মানুষের মাথার খুলি, হাড় পাওয়া যায়। 

 

***

 

Thousands of people (refugees), from Khulna and Bagerhat, spent the night at Chuknagar on 19 May. The refugees gathered in Chuknagar to go to Kolkata and they were waiting to cross the border.  But on next day, i.e. on 20th May, Pakistani military perpetrated a massive genocide. It is one of the largest genocides of the world perpetrated within this short time. 

More than 10 thousand men, women and children mostly belonging to minority community were killed by Pakistan military force. The military sprayed bullets on them from light machine guns and semi-automatic rifles and killed them on the spot within hours.

Bhadra River turned red with the blood of the martyrs. There were dead bodies here and there. Some says it is not less than 10-12 thousand. And some say they could count till 4,200, and after that they gave up.  

Most of the victims of this genocide were from different area as they were fleeing to India to take shelter. So, their names are still unknown. 

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    চুকনগর গণহত্যা, ৫ নং আটলিয়া ইউনিয়ন/ Chuknagar Genocide, 5 No Atlia Union
    <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">খুলনা-যশোর-সাতক্ষীরা জেলার সীমান্তবর্তী ভদ্রা নদীর কোলঘেঁষে চুকনগরে খুলনা বাগেরহাটসহ নানা জায়গার হাজার হাজার পরিবার ১৯ মে রাত কাটায়। উদ্দেশ্য ছিলো পরদিন সকালে ভারতের উদ্দেশ্যে যাত্রা। কিন্তু পরদিন ২০ মে ঘটে সম্ভবত পৃথিবীর ইতিহাসে অল্প সময়ে অধিক সংখ্যক মানুষ হত্যার এক ভয়ঙ্কর&nbsp; হত্যাযজ্ঞ। বেলা সাড়ে দশটা থেকে শুরু হয়ে এই নারকীয় তান্ডব চলে&nbsp; বিকাল অবধি। </span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">গুলি</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">ব্রাশ ফায়ার</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">বেওনেটের আঘাতে ও নদীপথে পলায়নরত নর নারী শিশুর সলিল সমাধিতে কতো মানুষের যে মৃত্যু হয় তার সঠিক হিসাব কেউ বলতে পারে না। তবে এই সংখ্যা কোন ক্রমেই দশ হাজারের কম নয়</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">বরং বেশি বলে মনে করেন প্রত্যক্ষদর্শী চুকনগর কলেজের অধ্যক্ষ এবিএম শফিকুল ইসলাম। পাকিস্তানি&nbsp; সেনাবাহিনীর উপর তেড়ে যাওয়া চিকন আলী মোড়লকে হত্যার মধ্য দিয়ে এখানকার হত্যাযজ্ঞ শুরু হয়। শহীদ চিকন আলীর ছেলে এরশাদ আলী মোড়ল আজও সেদিনের কথা মনে হলে বিক্ষুব্ধ হয়ে ওঠেন। তিনি বলেন ওরা [পাকিস্তানীরা] মানুষ না,মানুষ কখনো মানুষকে এভাবে মারতে পারে না।&nbsp;</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">প্রাণের মায়ায় যারা পালিয়ে যাচ্ছিল</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">তাদেরকে ওরা পাখির মত গুলি করে মারলো। গাছে উঠে</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">পানিতে নেমে কোনভাবেই তারা বাঁচতে পারলো না। </span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">এইসব লাশ সরিয়ে ছিলো কাওছার আলী</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">দলিল উদ্দিন</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">আনসার সরদার ও ইনছান সরদার। কাওছার আলী বলেন- সারাদিন ধরে লাশ সাফ করতে পারিনি। রক্তে&nbsp; নদীর পানি&nbsp; একেবারে টুকটুকে লাল হয়ে গিয়েছিলো। লাশের সংখ্যা দশ বারো হাজারের কম হবে না উল্লেখ করে তিনি বলেন</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">তাদের একজন বিয়াল্লিশ-শ পর্যন্ত গুনেছিলো। আর গুণতে পারিনি।</span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">লাশের গন্ধে নদীর পানি দুর্গন্ধ হয়। এছাড়া পাতাখোলা বিল</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">বেহারা পাড়া</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">তাঁতী পাড়া</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">রায় পাড়া</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">জেলে পাড়া</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">বাজার</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">মন্দির</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">বটতলা</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">নদীর তীর</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">ঝোপ ঝাড়ের আড়াল সকল জায়গায় শুধু লাশ আর লাশ। চুকনগর কলেজ প্রতিষ্ঠার সময় এখানে মানুষের মাথার খুলি</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">হাড় পাওয়া যায়।&nbsp;</span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">***</span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal" style="line-height: normal;"><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; color: black;">Thousands of people (refugees), from Khulna and Bagerhat, spent the night at Chuknagar on 19 May. The refugees gathered in Chuknagar to go to Kolkata and they were waiting to cross the border.</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: 'Cambria',serif; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; mso-bidi-font-family: Cambria; color: black;">&nbsp;</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; color: black;"> But on next day, i.e. on 20<sup>th</sup> May, Pakistani military perpetrated a massive genocide. It is one of the largest genocides of the world perpetrated within this short time.</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: 'Cambria',serif; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; mso-bidi-font-family: Cambria; color: black;">&nbsp;</span></p> <p class="MsoNormal" style="line-height: normal;"><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; color: black;">More than 10 thousand men, women and children mostly belonging to minority community were killed by Pakistan military force. The military sprayed bullets on them from light machine guns and semi-automatic rifles and killed them on the spot within hours.</span></p> <p class="MsoNormal" style="line-height: normal;"><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; color: black;">Bhadra River turned red with the blood of the martyrs. There were dead bodies here and there. Some says it is not less than 10-12 thousand. And some say they could count till 4,200, and after that they gave up.</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: 'Cambria',serif; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; mso-bidi-font-family: Cambria; color: black;">&nbsp;&nbsp;</span></p> <p class="MsoNormal" style="line-height: normal;"><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; color: black;">Most of the victims of this genocide were from different area as they were fleeing to India to take shelter. So, their names are still unknown.</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: 'Cambria',serif; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; mso-bidi-font-family: Cambria; color: black;">&nbsp;</span></p>
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    সুফলাকাঠি ইউনিয়ন গণহত্যা/ Sufalakathi Union Genocide
    <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; mso-bidi-font-size: 12.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">শ্রাবণ মাসের মাঝামাঝি সময়ে রাজাকাররা সুফলাকাঠি ইউনিয়নের বিভিন্ন গ্রামে হামলা চালিয়ে বেশ কয়েকজনকে নির্মমভাবে হত্যা করে। এসময় তারা গ্রামে গ্রামে ব্যাপক লুটপাট চালায় এবং ঘরবাড়িতে অগ্নিসংযোগ করে। এলাকায় বর্ধিঞ্চু হিন্দু পরিবার চৌধুরী বাড়িতে হামলা চালিয়ে তারা গৃহকর্তা গৃজানাথ চৌধুরী এবং তার পুত্র মুক্তিশংকর চৌধুরীকে নির্মমভাবে হত্যা করে। তাছাড়া সেদিন আরো অনেককে তারা হত্যা করে। এই শহিদ স্মরণে এলাকায় আজো পর্যন্ত কোন স্মৃতিফলক বা স্মৃতিস্তম্ভ নির্মিত হয় নি।</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; mso-bidi-font-size: 12.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">***&nbsp;</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; mso-bidi-font-size: 12.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">In between June-August, the Razakars raided various villages of Sufalakathi Union and killed several people. During this time, they looted the villagers and set fire to their houses. They attacked the house of a prominent Hindu Family Chowdhury&rsquo;s House, and brutally killed Girjanath Chowdhury and his son Mukti Shankar Chowdhury. Along with them, others were also killed. </span></p>
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    রানাই বকুলতলা বধ্যভূমি, ৪ নং খণির্য়া ইউনিয়ন, ডুমুরিয়া উপজেলা/ Ranai Bakultala Mass Killing Site, 4 No. Khornia Union
    <p class="MsoNoSpacing" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">খর্ণিয়া বাজার থেকে সোয়া এক কিমি উত্তরে খর্ণিয়া শাহপুর সড়কের পাশে ভদ্রা নদীর ত্রিমোহনায় রানাই গ্রামের একটি স্থানের নাম বকুলতলা। এ গ্রামে রাজাকার বাচ্চু ওয়াজেদ মোড়লের নেতৃত্বে ডিসেম্বরের বিজয়ের পূর্ব পর্যন্ত প্রায় শতাধিক লোককে হত্যা করা হয়। বিভিন্ন ভাবে এই হত্যা করা হয় গুলি করে</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN;">,</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: 'Cambria',serif; mso-bidi-font-family: Cambria; mso-bidi-language: BN;">&nbsp;</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">জবাই করে</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN;">,</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: 'Cambria',serif; mso-bidi-font-family: Cambria; mso-bidi-language: BN;">&nbsp;</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">হাত -পা বেঁধে জীবিত অবস্থায় নদীতে ফেলে দিয়ে হত্যা করা হতো</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: HI;" lang="HI">।&nbsp;</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Kalpurush;" lang="BN">আলে ও নলে নামক দুই</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Cambria, serif;">&nbsp;</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Kalpurush;"> <span lang="BN">ভাইকে জীবিত অবস্থায় হাত-পা বেঁধে পিঠে ইট বেঁধে নদীতে ফেলে দেয়। এখানে যারা হত্যার শিকার তারা হলেন</span></span><span style="font-size: 14pt; font-family: Kalpurush;" lang="BN">আগরহাটি গ্রামের নওশের খান</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Kalpurush;">,</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Cambria, serif;">&nbsp;</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Kalpurush;" lang="BN">খর্নিয়া গ্রামের আমজাদ ও জোনা</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Kalpurush;">,</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Cambria, serif;">&nbsp;</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Kalpurush;" lang="BN">শোলগাতি গ্রামের নিমাই ও হরেন পোদ্দার। বর্তমানে নদীর গতিপথ একটু পরিবর্তন হলে কালের সাক্ষী হয়ে আছে সেই বটগাছটি। তবে কোন স্মৃতিসৌধ এখানে নির্মিত হয়নি</span><span style="font-size: 14pt; font-family: Kalpurush;" lang="HI">।</span></p> <p class="MsoNoSpacing" style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p class="MsoNoSpacing" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; background: white;">***</span></p> <p class="MsoNoSpacing" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; font-family: Kalpurush; color: black; background: white;">There is a place named Bakultala in Ranai village. About 100 villagers were killed by the Razakars under the leadership of Bacchu Wajed Morol in 1971. Razakars killed people in various ways, sometimes they shot, sometimes they slaughtered.The people who were killed in the Bakultala are Nausher Khan of Agorhati village, Amzad and Jona of Khornia village, Nimai and Horen Poddar of Sholgati village. No monuments or memorials has been built yet.</span></p>
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    রানাই বকুলতলা নিযার্তন কেন্দ্র, ৪ নং খণির্য়া ইউনিয়ন/ Ranai Bakultala Torture center, 4 No. Khornia Union
    <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">খর্ণিয়া বাজার থেকে সোয়া এক কিমি উত্তরে খর্ণিয়া শাহপুর সড়কের পাশে ভদ্রা নদীর ত্রিমোহনায় রানাই গ্রামের একটি স্থানের নাম বকুলতলা। এ গ্রামে রাজাকার বাচ্চু ওয়াজেদ মোড়লের নেতৃত্বে ডিসেম্বরের বিজয়ের পূর্ব পর্যন্ত প্রায় শতাধিক লোককে হত্যা করা হয়। বিভিন্ন ভাবে এই হত্যা করা হয় গুলি করে</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white;">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">জবাই করে</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white;">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">হাত -পা বেঁধে জীবিত অবস্থায় নদীতে ফেলে দিয়ে হত্যা করা হতো। এই বকুলতলায় যারা হত্যার শিকার তারা হলেন আগরহাটি গ্রামের নওশের খান</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white;">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">খর্নিয়া গ্রামের আমজাদ ও জোনা</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white;">, </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">শোলগাতি গ্রামের নিমাই ও হরেন পোদ্দার। বর্তমানে নদীর গতিপথ একটু পরিবর্তন হলে কালের সাক্ষী হয়ে আছে সেই বটগাছটি।</span></p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">তবে কোন স্মৃতিসৌধ বা স্মৃতিফলক এখানে নির্মিত হয়নি।</span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;">***</span></p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;">There is a place named Bakultala in Ranai village. About 100 villagers were killed by the Razakars under the leadership of Bacchu Wajed Morol in 1971. Razakars killed people in various ways, sometimes they shot, sometimes they slaughtered.The people who were killed in the Bakultala are Nausher Khan of Agorhati village, Amzad and Jona of Khornia village, Nimai and Horen Poddar of Sholgati village. No monuments or memorials has been built yet. </span></p>
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    খণির্য়া খেয়াঘাট গণহত্যা, ৪ নং খণির্য়া ইউনিয়ন/ Khornia Kheyaghat genocide, 4 No. Khornia Union
    <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">ভদ্রা নদীর তীরে শোলগাতিয়া খেয়াঘাট [শ্মশানের পাশে]। এর পাশে মিকশিমিল গ্রামের মতলেব গাজীর পুত্র আকতার হোসেনের বাড়িতে রাজাকার ক্যাম্প</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: 'Cambria',serif; mso-bidi-font-family: Cambria; color: black; background: white;"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;">&nbsp;</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">স্থাপিত হলে এলাকায় শুরু হয় অত্যাচার নির্যাতন। তারা প্রতিদিন বিভিন্ন এলাকা থেকে লোকজন ধরে এনে এই খেয়াঘাটে হত্যা করে লাশ নদীতে ভাসিয়ে দিতো। বিভিন্ন এলাকার বহু লোক এখানে হত্যার শিকার হয়।</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: 'Cambria',serif; mso-bidi-font-family: Cambria; color: black; background: white;">&nbsp;</span></span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;">অধিকাংশ বহিরাগত থাকায় নাম পরিচয় উদ্ধার করা সম্ভব হয়নি।</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: 'Cambria',serif; mso-bidi-font-family: Cambria; color: black; background: white;">&nbsp;</span></span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;">কয়েক জনের পরিচয় জানা যায় তারা হলেন আব্দুর রাজ্জাক মোড়ল</span></span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white;"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">,</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: 'Cambria',serif; mso-bidi-font-family: Cambria; color: black; background: white;">&nbsp;</span></span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;">আব্দুল গনি বিশ্বাস</span></span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white;"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali';">,</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: 'Cambria',serif; mso-bidi-font-family: Cambria; color: black; background: white;">&nbsp;</span></span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;" lang="BN"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;">সুশীল কুমার ও আমজাদ আকুঞ্জি</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: HI;" lang="HI">।</span></span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: HI;">***</span></p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: HI;">Sholgatia Kheyaghat is situated on the bank of Bhadra river. The house of Akter Hussain is just beside this kheyghat, where Razakars built their camp in 1971.</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; color: black; background: white; mso-bidi-language: BN;">After establishing the camp, they started torturing local people. They used to abduct people from different areas every day and kill them, and then throw out the bodies in the river. Most the victims of the genocide remain unknown, only some of them are identified. They are Abdur Razzak Morol, Abdul Gani Biswas, Shushil Kumar and Amjad Akunji.</span></p>
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    খণির্য়া খেয়াঘাট বধ্যভূমি, ৪ নং খণির্য়া ইউনিয়ন, ডুমুরিয়া উপজেলা/ Khornia Kheyaghat mass killing site, 4 No. Khornia Union, Dumuria Upazila
    <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">খর্ণিয়ার ভদ্রা নদীর উপর বর্তমানে খুলনা সাতক্ষীরা সংযোগ সেতুটি ১৯৭১ সালে ছিলো খেয়াঘাট। পাশেই ছিলো খর্ণিয়া ইউনিয়ন পরিষদ ভবন। </span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">রাজাকাররা এখানে ক্যাম্প</span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">&nbsp;নির্মাণ করে এই খেয়াঘাট টিকে বধ্যভূমিতে পরিণত করেছিলো। এখানেও বীভৎস ভাবে মানুষকে হত্যা করা হতো। হাত-পা বেঁধে জীবিত মানুষকে বস্তায় ভরে নদীতে ফেলে হত্যা করতো। </span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">এ ছাড়া জবাই ও গুলি করে হত্যা করতো মুক্তিযুদ্ধের পুরোটা সময় ধরে এখানে শত শত লোককে নির্মম ভাবে হত্যা করা হয়। এদের মধ্যে কয়েকজনের পরিচয় পাওয়া<span style="mso-spacerun: yes;">&nbsp; </span>য়ায়-১] ললিত মোহন মল্লিক ২] আলো মাহমুদ ৩] ইউসুফ আলি<span style="mso-spacerun: yes;">&nbsp; </span>৪] শাহাজাহান শেখ ৫] মুনসুর শেখ ৬] বিবেক সরদার ৭] জগবন্ধু সরকার ৮] নওশের খান ও ৯। ওয়াহিদ অন্যতম।</span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">***</span></p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN"></span></p> <p class="MsoNormal" style="mso-margin-top-alt: auto; mso-margin-bottom-alt: auto; line-height: normal;"><span style="font-size: 14.0pt; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; mso-bidi-font-family: Vrinda; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; color: black; mso-bidi-language: BN;">In 1971, Khornia Kheyghat was beside Khornia Union Parishad building. The building was a concentration camp of Pakistani Military force and Kheyaghat was a mass killing site. Hundreds of people were exterminated here during the entire war-time. Most of the names remain unknown, only a few of the names are recognized. They are - Lalit Mohan Mallik,</span><span style="font-size: 14.0pt; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; mso-bidi-font-family: Vrinda; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; color: black; mso-bidi-language: BN;">Alo Mahmud, Yusuf Ali, Shahjahan Sheikh, Munsur Sheikh, Vivek Sardar, Jagabandhu Sarkar, Nowsher Khan and Wahid </span></p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: 'Siyam Rupali'; mso-bidi-language: BN;" lang="BN"></span></p>
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    মঙ্গলকোট ব্রিজ বধ্যভূমিয Mongalkot Bridge Mass Killing Field
    <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">মঙ্গলকোট ব্রিজের কাছে এই বধ্যভূমিতে মে মাস থেকে ডিসেম্বর পর্যন্ত কত মানুষকে যে হত্যা করা হয়েছে তাঁর সংখ্যা হিসেবে করা সম্ভব না। যুদ্ধকালে কেশবপুর উপজেলা ও বহিরাগত মিলে প্রায় ১০০০ মানুষকে এখানে হত্যা করা হয়েছে।</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">***</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">It is not possible to estimate the accurate number of people killed from May to December in this Mass Killing Field near the&nbsp;<span style="font-size: 14pt; line-height: 115%;">Mongalkot&nbsp;</span>Bridge. At least 1000 people were killed here during the wartime. <span style="mso-spacerun: yes;">&nbsp;</span></span></p>
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    মঙ্গলকোট বধ্যভূমি/ Mongalkot Mass Killing Field
    <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; mso-bidi-font-size: 12.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">৫ নং মঙ্গলকোট ইউনিয়নে মঙ্গলকোট বাজারে ব্রিজের কাছে একাত্তরে অসংখ্য মানুষকে হত্যা করা হয়েছিল। চুকনগর থেকে যশোর যাওয়ার মহাসড়কে মঙ্গলকোট বাজারের পাশে বুড়িভদা নদীর উপর মঙ্গলকোট ব্রিজ। এই ব্রিজের উত্তরপাশে এবং যশোর-কেশবপুর রোড সংলগ্ন পশ্চিম পাশে পাকিস্তানি সেনা ও রাজাকাররা একটা বড় বাংকার তৈরি করেছিল। ঐ বাংকারে তারা পালাক্রমে থাকতো। বাংকারের তিনপাশে কয়েকফুট উচুঁ ইটের তৈরি দেওয়াল ছিল। কেশবপুর উপজেলা, চুকনগরসহ আশে পাশের এলাকা থেকে স্বাধীনতাকামী জনগণ ও শরণার্থীদের ধরে এনে এই ব্রিজের ওপর দাঁড় করিয়ে হত্যা করে তাদের লাশ নদীতে ভাসিয়ে দিতো। মুক্তিযুদ্ধ চলাকালে প্রায় ১০০০ মানুষকে এখানে হত্যা করা হয়েছে।</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; mso-bidi-font-size: 12.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">***</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; mso-bidi-font-size: 12.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">Numerous people were killed in 5 No. Mongalkot Union, at the Mongalkot Market near the bridge. The Mongalkot Bridge is situated over the Burivada River, beside the market. On the north of this bridge and west of the Jessore-Keshabpur Road, the Pakistani army and Razakars built a large bunker with high brick walls. Many libertarian people and refugees from Keshabpur Upazilla, Chuknagar and neighboring area were abducted and killed on the bridge. At least 1000 people were killed here during wartime. </span></p>
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    খর্ণিয়া ইউনিয়ন পরিষদ ভবন নির্যাতন কেন্দ্র, ৪ নং খর্ণিয়া ইউনিয়ন/ Khornia Union Parishad Building Torture Centre, 4 No. Khornia Union
    <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; color: #222222; mso-ansi-language: EN; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">ভদ্রা নদীর উপর বর্তমানে খুলনা সাতক্ষীরা রোডে খর্ণিয়া সেতুটির কাছেই ১৯৭১ সালে ছিলো খেয়াঘাট। পাশেই ছিলো খর্ণিয়া ইউনিয়ন পরিষদ ভবন। রাজাকাররা এখানে ক্যাম্প নির্মাণ করে এই খেয়াঘাটটিকে বধ্যভূমিতে পরিণত করেছিলো। এখানেও বীভৎস ভাবে মানুষকে হত্যা করা হতো। হাত-পা বেঁধে জীবিত মানুষকে বস্তায় ভরে নদীতে ফেলে হত্যা করতো। এ ছাড়া জবাই ও গুলি করে হত্যা করতো মুক্তিযুদ্ধের পুরোটা সময় ধরে এখানে শত শত লোককে নির্মম ভাবে হত্যা করা হয়।&nbsp;</span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; color: #222222; mso-ansi-language: EN; mso-bidi-language: BN;" lang="BN">***</span></p> <p class="MsoNormal">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal"><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; color: #222222; mso-bidi-language: BN;">There was </span><span style="font-size: 14.0pt; line-height: 107%; font-family: Kalpurush; mso-fareast-font-family: 'Times New Roman'; color: #222222; mso-ansi-language: EN; mso-bidi-language: BN;" lang="EN">a Khyaghat at Khulna Satkhira Road, near Khornia Bridge, on the Bhadra river in 1971. Khornia Union Parishad building was located just on the side of the Kheyaghat. The Razakars set up their camp in this building. They used to torture and kill Bengali people in this camp. Hundreds of people were brutally killed here in 1971.</span></p>
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    মঙ্গলকোট ডাকবাংলো নিযার্তন কেন্দ্র/ Mongalkot Dakbungalow Torture Center
    <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; mso-bidi-font-size: 12.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">ব্রিজ থেকে প্রায় ৩০০ গজ দূরে ছিল জেলা পরিষদের এই ডাকবাংলো। ব্রিটিশ আমলে নির্মিত পাকা দেওয়াল ও টিনের চাল দেওয়া ডাকবাংলোটি ছিল নদীর পাশেই। বর্তমানে নদী শুকিয়ে যাওয়ায় এই স্থান থেকে অনেক দূরে সরে গেছে। একাত্তরে পাকিস্তানি সেনা ও রাজাকারেরা এই ডাক বাংলোতে অস্থায়ী ঘাঁটি নির্মাণ করে। এর পাশেই ছিল তাদের বিশাল একটি বাঙ্কার। সেই বাঙ্কারে সবসময় ভারী আগ্নেয়াস্ত্র তাক করে রাখা হতো। এর ফলে ঐ অঞ্চলের সাধারণ জনগণ ঐসব দেখে সবসময় তটস্থ ও আতঙ্কগ্রস্ত হয়ে থাকতো। প্রায় প্রতিদিন রাতে গুলি করে ও জবাই করে প্রচুর মানুষকে হত্যা করা হতো ব্রিজের উপর। পাকিস্তানি সেনারা ও রাজাকাররা দিনের বেলা বিভিন্ন এলাকায় মুক্তিযোদ্ধা ও তাদের সহযোগীদের খুঁজতে চলে যেতো, তাদের প্রাপ্ত তথ্যানুযায়ী। গ্রামে গ্রামে গিয়ে তাদের না পেলে ঘরবাড়ি আগুন দিয়ে জ্বালিয়ে দিতো, লুটপাট করতো। যাদের খুঁজে পেতো তাদেরকে ধরে এনে ডাকবাংলোর মধ্যে রেখে দিনের পর দিন অকথ্য নির্যাতন চালাতো। রাজাকাররা গ্রাম থেকে যুবতী মেয়ে ও স্ত্রীদের ধরে এনে পাকিস্তানি সেনাদের হাতে তুলে দিতো। পাকিস্তানি সেনারা দিনের পর দিন ঐ ডাকবাংলোতে রেখে তাদের ধর্ষণ ও নানারকম বীভৎস শারীরিক নির্যাতন চালাতো।</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; mso-bidi-font-size: 12.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">***</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 14.0pt; mso-bidi-font-size: 12.0pt; line-height: 115%; font-family: Kalpurush; mso-bidi-language: BN-BD;">The district council's Dakbungalow was about 300 yard from the bridge. The Dakbungalow was built during the British period. In 1971, The Pakistani army and Razakars built temporary base and a large bunker full of heavy firearms. As a result, the people of this are were always terrified to see them. Nearly every night many people were shot and slaughtered on the bridge. Pakistani troops and Razakars used to go to different areas during the day to search for freedom fighters and their supporters. If they did not find them in the villages, they would burn houses and loot them. The Razakars used to take young girls and women from the village and handed them over to the Pakistani army. The Pakistani soldiers raped and abused them ghastly days after days. </span></p>